होली आई रे !हाइकुहै होली आई फागुनी पुरवाई ये मस्ती छाई। है राधा संग बरसाने के रंग कान्हा मलंग। ले पिचकारी…रचना पढ़ें →
“खोज”कवितामिश्री से मीठे, निबोरी से कड़वे, कैक्टस से कटीले, फाहे से सोखते दर्द, रेत से सरकते, दलदल से…रचना पढ़ें →
फीकी मुस्कानकविताफीकी –सी धूप ठीक, उस फीकी सी मुस्कान सी जो सिमट जाती है माँ के चेहरे पर करती…रचना पढ़ें →
साथक्षणिकायूँ तो अपनी परछाई भी छोड़ देती है साथ, बिना रोशनी के कौन रहता है, हर लम्हा किसी…रचना पढ़ें →