पहचानकवितादेख ये है हैवानियत कुदरत भी है हैरान क्या मैंने ही बनाया था इंसान अपनी ही नस्लों को…रचना पढ़ें →
मुलाकातक्षणिकातुझसे मिलना इक रवायत नहीं किसी उम्र का महकता सुरूर भी नहीं बदली हवाओं में थमा सा कोई…रचना पढ़ें →
कोहराक्षणिकाक्यों पनपने लगती है वो बेल, हमारे भीतर ले कोहरे की छुहन । काटते रहे हर बार टुकड़ा…रचना पढ़ें →
शीर्षक रहित रचनामन की बातऐसा क्यों? सीमा स्मृति कल शाम जब टेलीविजन चलाया ही था कि न्यूज़ आई कि फरीदाबाद के होली…रचना पढ़ें →