रास्ता
क्षणिकाहौंसले बुलन्द हो तो, मंझधार से भी निकल जाती हैं कश्ती वरना तो, किनारों पर भी डूबते देखा…
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हौंसले बुलन्द हो तो, मंझधार से भी निकल जाती हैं कश्ती वरना तो, किनारों पर भी डूबते देखा…
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नौ माह की अवस्था से मेरे दोनों पांव में पोलियो हो गया था। ईश्वर की असीम कृपा एवं…
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कोख में मरना, जरूरी नहीं है पढ़ना, घर के सभी काम करना, प्यार से घबराना, हर कदम डर…
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पुराना है विषय नये हैं संदर्भ किसी प्ररेणा के गर्भ में ही पलता होगा प्रेम। आज हर चौराहे…
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“राशि हैलो तुझे पता है कि अनिल के फादर की क्रिया आज है। दस दिन बात उसके बेटे…
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सोचती हुँ कभी कभी हादसो से भरी इस दुनिया में फूलों का खिलना सूरज का चमकना पंछियों का…
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जिन्दगी में क्या हुआ अच्छा, हुआ क्या बुरा-घटनाओं से मत आंको वक्त के आईनें में- जिन्दगी सब दिखा…
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क्षणिक मुलाकात भी बन जाती है-उत्सव तारिखों में सिमटे हो उत्सव -ये जरूरी नहीं।
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