माटी
हाइकुकान्हा ने खाई माई सृष्टि दिखाई लीला रचाई। माटी से बने मिलेंगे माटी ही में क्यों हैं अन्जान…
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कान्हा ने खाई माई सृष्टि दिखाई लीला रचाई। माटी से बने मिलेंगे माटी ही में क्यों हैं अन्जान…
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वक़्त के आगे चले ना चतुराई समझो भाई। वक़्त सूरज दिखाता है ये राह ना घबराना । वक़्त…
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हुई खामोशी पतझर- सी पीली घूमे अकेली । ख़्वाबों के रंग क्यों हुए बदरंग बूझो पहेली । वो…
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कैसा लगा दीमक आज समाज में गलने लगा, सड़ने लगा हर रिश्ता! संबंध !एहसास गुरू-शिष्य पति-पत्नी बाप-बेटी भाई-भाई…
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अपने संग सहेजती मैं रंग तितली बन। टूटे सपने रूठ गए अपने बने पराये । खोजती पंख छू…
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1 वोह सांसों के साथ इक लम्हा बह गया, पकड़ो मत। ये क्या कम है,कौन अपना था समझ…
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सीमा स्मृतिवक्त की धार नैया पार या डूबे है, मझधार । पढ़ लो आँखें सुना देंगी कहानी ये…
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1 जिन लम्हों को समझ जिन्दगी, जिया मैंने आज एक अजब पहेली बन जिन्दगी में हैं छाये ।…
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