‘यादें’
हाइकुकहीं तस्वीर कहीं दिल में कैद यादें दीवानी। सरकंडों -सी चुभे,कभी फाहा हो सोखती दर्द । याद बादल…
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कहीं तस्वीर कहीं दिल में कैद यादें दीवानी। सरकंडों -सी चुभे,कभी फाहा हो सोखती दर्द । याद बादल…
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1 ये मनचला ले धूप का आंचल उड़ता चला । 2 बिजली रानी है, इसकी दीवानी दोस्ती पुरानी…
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मुस्कान बिखरी रहती है कुछ इस कद्र उन लबों पर यूं कि गमे नशा हो अब भी सरूर…
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कहते हैं वो जख्म मिलते हैं भर जाने को अश्क बहते हैं गम को भुलाने को ये क्या…
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उन बेबस खामोश निगाहों में उतर आया था शून्य सिमट गया था हर एहसास बिखर कर रह गई…
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जब भी तेरी तस्वीर,तस्वुर में आती है जिन्दगी पे एतबार की हर कड़ी बिखर जाती है।
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स्पर्श केवल, अंघकार की जबान नहीं, यह भाषा है, प्रत्येक जीवन की भट्टी के अंगारो की तरह उकेरा…
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