♪रचना सुनेंऑडियो उपलब्ध नहीं है क्षणिका8 नवम्बर 2013सीमा स्मृति ‘ इजाजत’ उन बेबस खामोश निगाहों में उतर आया था शून्य सिमट गया था हर एहसास बिखर कर रह गई थी जिन्दगी बस इक ‘ इजाजत’ की गूँज में ।