हाइकु
मन
मन की बातें असीमित अनंत बुझे जो संत। मन के रंग देखो जग के संग नयी तरंग। बदलो…
रचना पढ़ें : मन
18 रचनाएँ
मन की बातें असीमित अनंत बुझे जो संत। मन के रंग देखो जग के संग नयी तरंग। बदलो…
रचना पढ़ें : मन
भटके जीव खोजे है ठंड़ी छाँव जीवन गाँव। मन पथिक अनंत मरिचिका फंसे मीन-सा । देती थकन मन…
रचना पढ़ें : यात्रा
कुछ ऐसी, तेरी आदत हो गई मुझे ये कैसी इबादत जो खुद से जुदा कर रही मुझे। दिल…
रचना पढ़ें : क्षणिका
1 बौद्धिकता के ठेकेदार क्या जाने आम आदमी की ठोकरे देते हैँ नारे जलाते वक़्त की धारणनाये खुद…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना
आज याद कि पिटारी में से एक याद का मोती आप सब के लिए निकल आया। शायद से…
रचना पढ़ें : पिटारी यादों वाली
ये चाँद मियाँ ले बेगम चाँदनी गाते रागिनी । चाँदनी ओढ़े वधू-झील शर्माती दिल लुभाती। चाँद के आते…
रचना पढ़ें : चाँद – चाँदनी
1 चहकी बया, चौंका शिकारी,अब तेरी है बारी ? 2 रोज रावण रूप बदल सताते आये न राम…
रचना पढ़ें : प्रश्न