साल: 2016
18 रचनाएँ
2016
जनवरी
हाइकु
मीठी खुशबू
वक़्त ने खोली अनुभव पिटारी मिली ख़ुशबू। शिशु ख़ुशबू चहकती आँगना गाती तराने। स्वर्ग-नर्क ? ईमानदार लम्हा जीवन…
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अवर्गीकृत
मुलाकात
तुझसे मिलना इक रवायत नहीं किसी उम्र का महकता सुरूर भी नहीं बदली हवाओं में थमा सा कोई…
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हाइकु
भोर
भोर का शोर यूँ घोलता मिठास झूमे आकाश। भोर का रंग दे उम्मीदों के पंख भरो उड़ान ।…
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क्षणिका
अपनी गंध
आज फिर बटोरे मैंने, अपनी तन्हाई के टुकड़े जोड़े, दिया इक रूप दी धूप अपने होने की सर्दी…
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क्षणिका
शीर्षक रहित रचना
खुशबू चंद सूखे फूलों सी रिश्तों की महक आज भी मेरी जीवन किताब को, रही हैं महका जिन्हें…
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कविता
परिवर्तन
आज सुबह रास्ता बदल कर देखा कुछ नये मोड़ लिए हाँ! कुछ भूल हुईं कुछ दर्द मिले कुछ…
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