♪रचना सुनेंऑडियो उपलब्ध नहीं है क्षणिका6 जनवरी 2016सीमा स्मृति शीर्षक रहित रचना खुशबू चंद सूखे फूलों सी रिश्तों की महक आज भी मेरी जीवन किताब को, रही हैं महका जिन्हें मैंने सहेज लिया था इस डर से खुशबू कहीं कर दे न रुसवा। सीमा स्मृति