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शीर्षक रहित रचना

खुशबू 
चंद सूखे  फूलों सी
रिश्तों की महक
आज भी मेरी जीवन किताब को, रही हैं महका
जिन्हें मैंने सहेज लिया था
इस डर से
खुशबू कहीं कर दे न रुसवा।

सीमा स्मृति