हाइकु
सर्दी
संवेदना-सी जमी, सर्दी की शामें ढूंढती आंच । खोजते,इक टुकड़ा आशियाना सर्दी का आना। रैन-बसेरा ये ना मेरा,ना…
रचना पढ़ें : सर्दी
56 रचनाएँ
संवेदना-सी जमी, सर्दी की शामें ढूंढती आंच । खोजते,इक टुकड़ा आशियाना सर्दी का आना। रैन-बसेरा ये ना मेरा,ना…
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नमकीन सी हो गई तेरी खामोशी क्या मुझ से हुई कोई गुस्ताखी । 06.12.2013
रचना पढ़ें : ये हुआ
दूरियाँ वक्त की कमी से नहीं शहरों के अंतराल से नहीं एहसास की सरहद में आंकी जाती है।…
रचना पढ़ें : दूरियाँ
पहले---- तेरी खामोशी प्यार के इकरार का शोर मचाती थी अब----- खामोशी में लिपटा तेरा अहं हर बार…
रचना पढ़ें : बदलाव
कहते हैं मिली हैं सांसे सभी को गिनती भर खेलते खेल इन्हीं सांसो पर सुख :दुख के झूले…
रचना पढ़ें : सांसे
नोचे गए रिश्तों भाई –भाई बहन- भाई गुरू- शिष्य जनता –नेता पत्रकार-पत्रकारिता पति-पत्नी हर सामाजिक रिश्ते की लगती…
रचना पढ़ें : लाइव
पचास पार पनपे ये इंतजार क्या होगा यार। धूप आंगना होगा अब आराम आया विराम । वो घड़ी…
रचना पढ़ें : रिटायरमेंट
माँ ! माई! मम्मी बिटिया पुकारती मैं इठलाती । है घर द्वार बजती शहनाई ये रानी आई। तेरे…
रचना पढ़ें : बिटिया