लघुकथा
‘उत्सव’
महानगरों में प्रत्येक हाऊसिंग सोसाइटी के आस पास या कुछ दूरी पर प्राय: एक झुगी झोंपडी बस्ती होती…
रचना पढ़ें : ‘उत्सव’
56 रचनाएँ
महानगरों में प्रत्येक हाऊसिंग सोसाइटी के आस पास या कुछ दूरी पर प्राय: एक झुगी झोंपडी बस्ती होती…
रचना पढ़ें : ‘उत्सव’
निशा, क्या बात है, आरती अपना स्कूटर रोक कर क्या कह रही थी ? अरे यार कुछ नहीं…
रचना पढ़ें : ऐसा भी होता है
मीरा अस्पताल में है, मिसेज शर्मा ने कहा । क्या हुआ मीरा को, मिसेज बंसल ने पूछा ।…
रचना पढ़ें : सहानुभूति
पत्नी: आपको मालूम है, आज रात नौ बजे टी वी में आंतक एंवम् आंतकवादियों पर विशेष कार्यक्रम दिखाया…
रचना पढ़ें : परेशानी
तुम भी कहते रहे, हम भी कहते गए रिश्ता हमारे बीच अब कुछ भी नहीं फिर क्यों धड़कने…
रचना पढ़ें : एतबार
तुमने कहा आज अजीब बासीपन, रूकी हुई, जीवनवहीन सी, अब है तुम्हारी जिन्दगी, अजीब अलास सा आता बोलने…
रचना पढ़ें : खोजती मैं
सीमा स्मृति ये सिलसिला खौफ के घने साए बढ़ते चले जाएँ, माँ- बेटी -बहू हर दिल पे छाएँ…
रचना पढ़ें : आज का सच