कविता
एतबार
क्यों,कलम हाथ आते ही खो जाते हैं शब्द उन साथियों की तरह जो खो गए मात्र अपनत्व का…
रचना पढ़ें : एतबार
56 रचनाएँ
क्यों,कलम हाथ आते ही खो जाते हैं शब्द उन साथियों की तरह जो खो गए मात्र अपनत्व का…
रचना पढ़ें : एतबार
बच्चों को छबीस जनवरी दिखाने का प्रोग्राम बनाया गया । भईया ने कार निकाली और हम अपने घर…
रचना पढ़ें : बच्चों के मुख से
कुछ यथार्थ तुम्हारे हैं कुछ यथार्थ मेरे फिर कुछ हैं ---- हमारे यथार्थ में । तुम चलते रेगिस्तान…
रचना पढ़ें : फ़ासले
हर क्षण होठों पर सिमटी मुस्कराहट के पीछे क्या आपने देखी है- बनावट की मोटी परत क्या महसूस…
रचना पढ़ें : रहस्य
ऐसा भी होता है निशा, क्या बात है, आरती अपना स्कूटर रोक कर क्या कह रही थी ?…
रचना पढ़ें : ऐसा भी होता है
जब कभी हिजडों को रेड लाइटो पर भीख मांगते देखती हूँ तो मन द्रवित सा हो जाता है।…
रचना पढ़ें : “ प्रश्न”
गरिमा, आज तुम फिर लेट हो गई, क्या हुआ? क्या बताऊ यार हम वर्किगं लेडीज की बहुत-सी समस्याएँ…
रचना पढ़ें : ‘कैसे कहूँ क्यों…….?
‘एक’ रचना : प्रिया अब तो तुम्हारे मम्मी पापा ने भी तुम्हारे और रमन के प्यार को स्वीकृति…
रचना पढ़ें : दहेज प्रथा ( एक दौ तीन )