कविता
‘शून्य एहसास’
क्या फर्क पड़ता है आघात-प्रतिघात से जब दर्द का एहसास शून्य पड़ जाता है। यथार्थ तड़पता है— महज…
रचना पढ़ें : ‘शून्य एहसास’
1 रचनाएँ
क्या फर्क पड़ता है आघात-प्रतिघात से जब दर्द का एहसास शून्य पड़ जाता है। यथार्थ तड़पता है— महज…
रचना पढ़ें : ‘शून्य एहसास’