कविता
रेखा
जिन्दगी की किताब के पृष्ठ बदलते रहे उन पर अंकित गहरी काली रेखाएँ कुछ अमिट तनिक सिमट कहती…
रचना पढ़ें : रेखा
56 रचनाएँ
जिन्दगी की किताब के पृष्ठ बदलते रहे उन पर अंकित गहरी काली रेखाएँ कुछ अमिट तनिक सिमट कहती…
रचना पढ़ें : रेखा
जिन्दगी करती है सवाल मुझसे क्या है गम और है क्या खुशी ? अतल सागर में तलाशता है…
रचना पढ़ें : .साथी
अपने संग सहेजती मैं रंग तितली बन। टूटे सपने रूठ गए अपने बने पराये । खोजती पंख छू…
रचना पढ़ें : अधूरे सपने
तपते दिन और बेचैन रातें तन्हा सफर । थमें या बहें पलकों पर रुके अश्क ये कहें ।…
रचना पढ़ें : इंतजार
है मिला, सब दुख उसका भी है अभिन्न साथी । दुख सुख हैं भाव अनुभूतियॉं अर्थ अनेक ।…
रचना पढ़ें : सुख दुख
अंकुरित सा खिलता कोंपल सा जीवन गीत । पहला प्यार बहार बन आया खिला चमन । मुलाकातो का…
रचना पढ़ें : बदलता रिश्ता
बेपरवाह हँसी-सी,ये फिसली ओर ना छोर । कहे पवन छू तन और मन मेरा गगन । पवन बिन…
रचना पढ़ें : पवन
मैं कोई गुजारा लम्हा नहीं जिसे भुलाने की कोशिश हो मैं इक सच हूँ मैं इक यथार्थ हूँ…
रचना पढ़ें : प्रयास