क्षणिका
‘मूक’
स्पर्श केवल, अंघकार की जबान नहीं, यह भाषा है, प्रत्येक जीवन की भट्टी के अंगारो की तरह उकेरा…
रचना पढ़ें : ‘मूक’
56 रचनाएँ
स्पर्श केवल, अंघकार की जबान नहीं, यह भाषा है, प्रत्येक जीवन की भट्टी के अंगारो की तरह उकेरा…
रचना पढ़ें : ‘मूक’
याद कोई बादल नहीं, जो आये और चली जाये ये तो वो थिर सूरज है जो चमकता है…
रचना पढ़ें : याद
जो ‘अर्थ’ जिन्दगी को हम देना चाहते हैं अर्थ स्वंय जो पाती है जिन्दगी इसी कशमकश में अक्सर…
रचना पढ़ें : प्रश्न
तेरे कहने से, मैंनें दिया इक रूप अपने एहसासों को बांध कर तेरी याद मुट्ठी में उड़ा रही…
रचना पढ़ें : तेरी याद
ऐस्सी कार के रंगीन शीशों से झांकती दो आंखे, फेर लेती हैं मुहँ चिलचिलाती धूप में, देख अर्धनग्न…
रचना पढ़ें : कपड़े
ओस की बूंद-सा अस्तित्व सूर्य किरण में सिमटता चन्द्र किरण से खिलता ये अस्तित्व के धरातल पर ओस-सा…
रचना पढ़ें : ओस सा अस्तित्व
परिस्थितियों की कठपुतली आवाज देती है जब कभी निज अस्तित्व की केवल प्रतिघ्वनित होकर रह जाती है वो…
रचना पढ़ें : निज अस्तित्व
कब तलग जोड़ते, सहेजते रहोगे वो पैबंद, जो लगाये थे तुमनें मेरी जिन्दगी में प्यार के नाम पर…
रचना पढ़ें : पैबंद