♪रचना सुनेंऑडियो उपलब्ध नहीं है क्षणिका7 नवम्बर 2013सीमा स्मृति प्रश्न जो ‘अर्थ’ जिन्दगी को हम देना चाहते हैं अर्थ स्वंय जो पाती है जिन्दगी इसी कशमकश में अक्सर निकल जाती है जिन्दगी ।