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वो क्‍या जानें

         कहते हैं वो
  जख्‍म मिलते हैं भर जाने को
  अश्‍क बहते हैं गम को भुलाने को 
  ये क्‍या जाने जख्‍म देने वाले 
  सूख जाया करते हैं अश्‍क 
  जख्‍म के नासूर हो जाने पर।