♪रचना सुनेंऑडियो उपलब्ध नहीं है क्षणिका8 नवम्बर 2013सीमा स्मृति वो क्या जानें कहते हैं वो जख्म मिलते हैं भर जाने को अश्क बहते हैं गम को भुलाने को ये क्या जाने जख्म देने वाले सूख जाया करते हैं अश्क जख्म के नासूर हो जाने पर।