अपनापन
क्षणिकासुना करते थे ओैरों की बेवफाई के किस्से खुद पर जो गुजरी कोई क्या सुनता अपने ही अश्क…
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सुना करते थे ओैरों की बेवफाई के किस्से खुद पर जो गुजरी कोई क्या सुनता अपने ही अश्क…
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कल तेरी आँखों में नींद नहीं थी आज मेरी से है,गायब दो किनारे ही अक्सर,जीते हैं इक ही…
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ये चारो ओर अहम् का गुबार बनावट आधार नोंचे- खसौटे मानवता व प्यार है टूटा एतबार। कैसा माहौल…
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सब कुछ बदलते देख लिया रिश्ते-नाते लोग- व्यवाहर वक्त- प्यार रहन-सहन आचार विचार शरीर - आयु आधार -संस्कार…
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टिमटिमता आशा-दीप,कहे यही जिन्दगी। होगा सवेरा रोज कहे अंधेरा हो चक्र पूरा। दिखाई राह तुम साथ निभाना भूल…
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लिखी जा सकती है एक लम्बी कविता बन्दर और मगरमच्छ की कहानी का कापी राइट लेकर मीठी, सुन्दर…
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जंगल की आग की तरह तेरी याद मेरे अस्तित्व को झुलसाती है बीते वक्त का, हर लम्हा कैटालिस्ट…
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