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सत्‍य

जंगल की आग की तरह
तेरी याद
मेरे अस्तित्‍व को झुलसाती है
बीते वक्‍त का, हर लम्‍हा
कैटालिस्‍ट बन
मेरे वर्तमान की जड़े, झुलसाने लगा ।