लिखी जा सकती है एक लम्बी कविता बन्दर और मगरमच्छ की कहानी का कापी राइट लेकर मीठी, सुन्दर गहन----- कविता मैं तो केवल एहसासों को करती रही शब्दबद्ध भ्रम ही सही लगा क्या ये कविता है खोजती अस्तित्व संघर्षरत जिन्दगी जीती लम्हें पिरोती शब्द ये भी नहीं जानती ..... क्या है कविता अपने ही पिरोये शब्द अंकित कर जीने लगी जिन्दगी लगा रास्ता आसान ना सही मंजिल भी नहीं फिर भी जीया जा सकता है अकेले चलने लगी पिरोती एहसास अपने साथ ।

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