♪रचना सुनेंऑडियो उपलब्ध नहीं है क्षणिका28 दिसम्बर 2014सीमा स्मृति पल मांगे जो दो पल सिर्फ अपने लिये हज़ारों बहाने अफ़साने मिले अपनों के भेष में पराये मिले। सीमा स्मृति