रचना सुनें

ऑडियो उपलब्ध नहीं है

वक्‍त

कभी ख़ामोशी लगती है जुबां प्यार की
कौन जाने, कब बन जाये सज़ा प्‍यार की ।
                               सीमा स्‍मृति