साल: 2015
33 रचनाएँ
2015
फ़रवरी
जनवरी
कविता
“खोज”
मिश्री से मीठे, निबोरी से कड़वे, कैक्टस से कटीले, फाहे से सोखते दर्द, रेत से सरकते, दलदल से…
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कविता
फीकी मुस्कान
फीकी –सी धूप ठीक, उस फीकी सी मुस्कान सी जो सिमट जाती है माँ के चेहरे पर करती…
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क्षणिका
साथ
यूँ तो अपनी परछाई भी छोड़ देती है साथ, बिना रोशनी के कौन रहता है, हर लम्हा किसी…
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क्षणिका
साथ
‘साथ’ वादों से नहीं इरादों से बना करते हैं इरादे विश्वास में झलका करते हैं दोस्तों विश्वास किया…
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क्षणिका
जीवन
देखे हैं तेरी खुशी में, तितलियों के पंखों से रंग । सुनी है मैंने तेरी खुशी में, भँवरों…
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