सोचती हुँ कभी कभी हादसो से भरी इस दुनिया में फूलों का खिलना सूरज का चमकना पंछियों का चहचहाना बच्चों का मुस्कराना बदलों का गड़गड़ाना नदियों का छन-छनाना ना होती ये सुरलहरियों तो जिन्दगी कैसी होती?

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सोचती हुँ कभी कभी हादसो से भरी इस दुनिया में फूलों का खिलना सूरज का चमकना पंछियों का चहचहाना बच्चों का मुस्कराना बदलों का गड़गड़ाना नदियों का छन-छनाना ना होती ये सुरलहरियों तो जिन्दगी कैसी होती?