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प्रश्‍न

सोचती हुँ कभी कभी
हादसो से भरी इस दुनिया में 
फूलों का खिलना 
सूरज का चमकना
पंछियों का चहचहाना
बच्‍चों का मुस्‍कराना
बदलों का गड़गड़ाना
नदियों का छन-छनाना
ना होती ये सुरलहरियों
तो जिन्‍दगी  कैसी होती?