कोख में मरना, जरूरी नहीं है पढ़ना, घर के सभी काम करना, प्यार से घबराना, हर कदम डर जाना, रोना, पर सिसकियाँ ना भरना। दहेज की आग में जलायी जाओ, सामूहिक बलत्कार में मारी जाओ, एसिड से नहलाई जाओ, हर यातना सहना, आह कभी ना भरना, स्त्री तेरी एक परिभाषा तिल तिल कर मरना और एक पुरूष को जन्म देना।

रचना सुनें
ऑडियो उपलब्ध नहीं है