♪रचना सुनेंऑडियो उपलब्ध नहीं है क्षणिका27 दिसम्बर 2014सीमा स्मृति प्रतिबिम्ब वो आया था मेरी जिन्दगी की सिलवटें पढ़ने देख आईना नि:शब्द लौट गया। सीमा स्मृति