देखे हैं तेरी खुशी में, तितलियों के पंखों से रंग । सुनी है मैंने तेरी खुशी में, भँवरों की गुनगुन मैं जानने लगी हूँ अस्तित्व के धरातल पर तू संधर्ष की लहरों से टकराता प्रतिपल मुस्कराता और कहता दोस्त- यही जीवन यही जीवन। सीमा स्मृति

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