- तन की नहीं,
मन की शक्ति के ही
ये हैं पुजारी। - दया न माँगे,
न सहानुभूति हीं,
दे दो दुलार। - मुस्कराते वो
ले संघर्ष-मशाल
मंजिल पार। - लब खामोश
सफर तन्हा सही
जीतेगें जंग। - नहीं बजती
कानों में कोई धुन
बोलती आँखे। - रोशनी दूर
हौंसले हैं बुंलद
मंजिल पास। - अस्फुट शब्द
कह डालते बात
भावों के भरी। - विकट स्थिति
लाँघते चले जाते
आशा के संग। - संघर्ष-ताल
थामे आशा का हाथ
थिरकते वो। - मुस्कराहट
समेटे होठों पर,
प्रेरणा स्रोत। - सोच है ऊँची
पहाड़ों-से इरादे
ये बेमिसाल। - स्वीकृति नहीं
समाज की आँखों में,
बाँटते प्यार।

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