कौन है -वो शांत बर्फ गिरने के बाद घाटी -सी मासूम सर्दी की भोर -सी चंचल पहली बरसात के बाद नदी-सी ख़ामोश झील की तह-सी मीठी झरने की पहली-धारा सी दुखी फटी धरती की दरारों- सी परेशान छाँव को तरसते-भटकते राहगीर-सी हाँ वो जिन्दगी ही है आईने सी खुद पे मुस्करा रही। सीमा स्मृति

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