कविता
शीर्षक रहित रचना
‘समय की धारा’ गम के साये में समझ पाये, कौन अपने हैं कौन है पराये। पिघली बर्फ,नदी हो…
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‘समय की धारा’ गम के साये में समझ पाये, कौन अपने हैं कौन है पराये। पिघली बर्फ,नदी हो…
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