♪रचना सुनेंऑडियो उपलब्ध नहीं है क्षणिका8 नवम्बर 2013सीमा स्मृति मुस्कान मुस्कान बिखरी रहती है कुछ इस कद्र उन लबों पर यूं कि गमे नशा हो अब भी सरूर पर।