♪रचना सुनेंऑडियो उपलब्ध नहीं है क्षणिका13 नवम्बर 2013सीमा स्मृति सत्य जंगल की आग की तरह तेरी याद मेरे अस्तित्व को झुलसाती है बीते वक्त का, हर लम्हा कैटालिस्ट बन मेरे वर्तमान की जड़े, झुलसाने लगा ।