♪रचना सुनेंऑडियो उपलब्ध नहीं है हाइकु8 जनवरी 2014सीमा स्मृति वसन्त प्रसन्न मनप्रफुल्लित है तन,आया वसन्त। मन के तारबिना साज के राग छाया वसन्त महके फूलतितली चूमे होंठभँवरे गाएँ। धुन बजती थिरकते कदमझूमे है धरा