♪रचना सुनेंऑडियो उपलब्ध नहीं है क्षणिका23 फ़रवरी 2014सीमा स्मृति रास्ता हौंसले बुलन्द हो तो, मंझधार से भी निकल जाती हैं कश्ती वरना तो, किनारों पर भी डूबते देखा है कश्ती को । 23.02.2014