- यादें मृदुल
हर दर्द मिटा दें
दे के संबल । - जीवन बीता
तेरी यादों के संग
यूं भी संगम। - ये इंतजार
सिमटा ख़ामोशी में
करता शोर। - दर्द है बाकी
आवाज की ख़लिश
सुनाती हाल । - मन की माला
टूटी, बिखरे मोती
मिला ना साथ । - गाते मल्हार
छेड़े हैं स्वरागिनी
साँसो के तार । - हरे थकान
खिली मेरे आँगन
मीठी मुस्कान । - गाती कोयल
लिखे किसने बोल
दें, मिश्री घोल । - कौन सुनेगा
दर्द भरी आवाज
बधिर साज। - ख़ामोश हवा
यूँ ख़ामोश सांसों सी
लेती सिसकी । - आई है भोर
लाई शुभ सन्देश
हो श्री गणेश । - मन के हंस
चले लहरों संग
गाते रागिनी । - यादों के पाखी
लेने को थे उड़ान
खिचें मुस्कान । - रूह को मिले
अद्भुत सुकून सी
तेरी मुस्कान। - कहती भोर
ख्वाब नये तू सजा
कर ये पूजा। - सिमटी शाम
ख़ामोशी का रंग ले
फैलाती बाहें । - ये गुपचुप
बातें, हँसी ठिठोली
धरा की झोली । - ये नटखट
खेले है, आंख-मिचौनी
धरा संगिनी । - है झिलमिल
मोहिनी-सा ये रूप
श्रद्धा स्वरूप ।

रचना सुनें
ऑडियो उपलब्ध नहीं है