साल: 2014

82 रचनाएँ

2014

दिसम्बर

क्षणिका

पल

मांगे जो दो पल सिर्फ अपने लिये हज़ारों बहाने अफ़साने मिले अपनों के भेष में पराये मिले। सीमा…

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सदोका

माँ

हर सुबह दुओं की पोटली निकालती मेरी माँ चुन दुआएं राहों में देती बिछा कष्‍टाें से लेती बचा…

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