साल: 2014

82 रचनाएँ

2014

नवम्बर

सितम्बर

क्षणिका

वक्‍त

देखती तुम्‍हारी तस्‍वीर वक्‍त जादू वक्‍त पहेली वक्‍त नशा वक्‍त सजा वक्‍त मेहरबानी वक्‍त निशानी वक्‍त तकदीर वक्‍त…

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जुलाई

कविता

शब्‍द

मैं खोजती शब्‍द.........घर के हर कोने मेंदरवाजों के पीछेबंद संदूकों मेंआंगन में, चौबारे परपरछती परपलंग के नीचेअलमारी के…

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जून

मई

अप्रैल

कविता

बचा लो

कैसा लगा दीमक आज समाज में गलने लगा, सड़ने लगा हर रिश्‍ता! संबंध !एहसास गुरू-शिष्‍य पति-पत्‍नी बाप-बेटी भाई-भाई…

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