हाइकु
जीवन के रंग
अपने संग सहेजती मैं रंग तितली बन। टूटे सपने रूठ गए अपने बने पराये । खोजती पंख छू…
रचना पढ़ें : जीवन के रंग
82 रचनाएँ
अपने संग सहेजती मैं रंग तितली बन। टूटे सपने रूठ गए अपने बने पराये । खोजती पंख छू…
रचना पढ़ें : जीवन के रंग
1 वोह सांसों के साथ इक लम्हा बह गया, पकड़ो मत। ये क्या कम है,कौन अपना था समझ…
रचना पढ़ें : क्षणिका
सीमा स्मृतिवक्त की धार नैया पार या डूबे है, मझधार । पढ़ लो आँखें सुना देंगी कहानी ये…
रचना पढ़ें : वक्त की धार
1 जिन लम्हों को समझ जिन्दगी, जिया मैंने आज एक अजब पहेली बन जिन्दगी में हैं छाये ।…
रचना पढ़ें : जिन्दगी पहेली
हौंसले बुलन्द हो तो, मंझधार से भी निकल जाती हैं कश्ती वरना तो, किनारों पर भी डूबते देखा…
रचना पढ़ें : रास्ता
नौ माह की अवस्था से मेरे दोनों पांव में पोलियो हो गया था। ईश्वर की असीम कृपा एवं…
रचना पढ़ें : मेरे ख़्वाबों का सफर
कोख में मरना, जरूरी नहीं है पढ़ना, घर के सभी काम करना, प्यार से घबराना, हर कदम डर…
रचना पढ़ें : स्त्री : एक परिभाषा
पुराना है विषय नये हैं संदर्भ किसी प्ररेणा के गर्भ में ही पलता होगा प्रेम। आज हर चौराहे…
रचना पढ़ें : प्रेम और प्ररेणा