लघुकथा
सुख : दुख
“राशि हैलो तुझे पता है कि अनिल के फादर की क्रिया आज है। दस दिन बात उसके बेटे…
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82 रचनाएँ
“राशि हैलो तुझे पता है कि अनिल के फादर की क्रिया आज है। दस दिन बात उसके बेटे…
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सोचती हुँ कभी कभी हादसो से भरी इस दुनिया में फूलों का खिलना सूरज का चमकना पंछियों का…
रचना पढ़ें : प्रश्न
जिन्दगी में क्या हुआ अच्छा, हुआ क्या बुरा-घटनाओं से मत आंको वक्त के आईनें में- जिन्दगी सब दिखा…
रचना पढ़ें : आईना
क्षणिक मुलाकात भी बन जाती है-उत्सव तारिखों में सिमटे हो उत्सव -ये जरूरी नहीं।
रचना पढ़ें : उत्सव
बड़े घर की परिभाषा बदल गई कमरे हैं बहुत एक ही कमरे सभी करते थे हँसी-ठिठोली, वो निकल…
रचना पढ़ें : परिभाषा
मुश्किल है समझना खामोशी, जो कहीं हथियार कहीं अहम् की तलवार कहीं बेबसी कहीं प्यार कहीं एतबार कहीं…
रचना पढ़ें : खामोशी
क्या मुसीबत है, ये स्कूल वाले तो सर्दियों की छुटियाँ आगे ही बढ़ाते जा रहे हैं। अब तो…
रचना पढ़ें : धुंध
चेंज-1 “अरे वाह! नीतू इस पिक में तो तुम बहुत सुन्दर लग रही हो, कौन सी जगह है…
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