- देखो आईना
करो सवाल, क्यों है
ये भ्रष्टाचार। - शब्दों से नहीं
पाटी जाए बीमारी
ये लाइलाज। - वायरस ये
करे जड़ें खोखली
ध्वस्त समाज। - ये दलदल
खींचे है पल पल
बढ़ता जाए। - कोलगेट के
हजारों खुले गेट
गिनती भूले।

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