परिवर्तन
आज सुबह रास्ता बदल कर देखा कुछ नये मोड़ लिए हाँ! कुछ भूल हुईं कुछ दर्द मिले कुछ…
रचना पढ़ें : परिवर्तन
36 रचनाएँ
आज सुबह रास्ता बदल कर देखा कुछ नये मोड़ लिए हाँ! कुछ भूल हुईं कुछ दर्द मिले कुछ…
रचना पढ़ें : परिवर्तन
मिश्री से मीठे, निबोरी से कड़वे, कैक्टस से कटीले, फाहे से सोखते दर्द, रेत से सरकते, दलदल से…
रचना पढ़ें : “खोज”
फीकी –सी धूप ठीक, उस फीकी सी मुस्कान सी जो सिमट जाती है माँ के चेहरे पर करती…
रचना पढ़ें : फीकी मुस्कान
नव-वर्ष की शुभकामनाओं के लिए एहसास की सुगन्ध चाहिए यूं तो नि:शब्द भी---- जीवन की बगिया महकती है,…
रचना पढ़ें : नव-वर्ष
देख ये है हैवानियत कुदरत भी है हैरान क्या मैंने ही बनाया था इंसान अपनी ही नस्लों को…
रचना पढ़ें : पहचान
मैं खोजती शब्द.........घर के हर कोने मेंदरवाजों के पीछेबंद संदूकों मेंआंगन में, चौबारे परपरछती परपलंग के नीचेअलमारी के…
रचना पढ़ें : शब्द
कैसा लगा दीमक आज समाज में गलने लगा, सड़ने लगा हर रिश्ता! संबंध !एहसास गुरू-शिष्य पति-पत्नी बाप-बेटी भाई-भाई…
रचना पढ़ें : बचा लो
कोख में मरना, जरूरी नहीं है पढ़ना, घर के सभी काम करना, प्यार से घबराना, हर कदम डर…
रचना पढ़ें : स्त्री : एक परिभाषा