प्रेम और प्ररेणा
पुराना है विषय नये हैं संदर्भ किसी प्ररेणा के गर्भ में ही पलता होगा प्रेम। आज हर चौराहे…
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36 रचनाएँ
पुराना है विषय नये हैं संदर्भ किसी प्ररेणा के गर्भ में ही पलता होगा प्रेम। आज हर चौराहे…
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सोचती हुँ कभी कभी हादसो से भरी इस दुनिया में फूलों का खिलना सूरज का चमकना पंछियों का…
रचना पढ़ें : प्रश्न
मुश्किल है समझना खामोशी, जो कहीं हथियार कहीं अहम् की तलवार कहीं बेबसी कहीं प्यार कहीं एतबार कहीं…
रचना पढ़ें : खामोशी
उडेल सको अपनी थकान,मुस्कान चिढ़ और गुस्सा चिल्लाया जा सके झल्लाया जा सके शब्द बोझ न हो जहाँ…
रचना पढ़ें : कल्पना या यथार्थ
नोचे गए रिश्तों भाई –भाई बहन- भाई गुरू- शिष्य जनता –नेता पत्रकार-पत्रकारिता पति-पत्नी हर सामाजिक रिश्ते की लगती…
रचना पढ़ें : लाइव
सब कुछ बदलते देख लिया रिश्ते-नाते लोग- व्यवाहर वक्त- प्यार रहन-सहन आचार विचार शरीर - आयु आधार -संस्कार…
रचना पढ़ें : ये कैसा सच
लिखी जा सकती है एक लम्बी कविता बन्दर और मगरमच्छ की कहानी का कापी राइट लेकर मीठी, सुन्दर…
रचना पढ़ें : सफर
ऐस्सी कार के रंगीन शीशों से झांकती दो आंखे, फेर लेती हैं मुहँ चिलचिलाती धूप में, देख अर्धनग्न…
रचना पढ़ें : कपड़े