कविता
ओस सा अस्तित्व
ओस की बूंद-सा अस्तित्व सूर्य किरण में सिमटता चन्द्र किरण से खिलता ये अस्तित्व के धरातल पर ओस-सा…
रचना पढ़ें : ओस सा अस्तित्व
36 रचनाएँ
ओस की बूंद-सा अस्तित्व सूर्य किरण में सिमटता चन्द्र किरण से खिलता ये अस्तित्व के धरातल पर ओस-सा…
रचना पढ़ें : ओस सा अस्तित्व
परिस्थितियों की कठपुतली आवाज देती है जब कभी निज अस्तित्व की केवल प्रतिघ्वनित होकर रह जाती है वो…
रचना पढ़ें : निज अस्तित्व
कब तलग जोड़ते, सहेजते रहोगे वो पैबंद, जो लगाये थे तुमनें मेरी जिन्दगी में प्यार के नाम पर…
रचना पढ़ें : पैबंद
जिन्दगी की किताब के पृष्ठ बदलते रहे उन पर अंकित गहरी काली रेखाएँ कुछ अमिट तनिक सिमट कहती…
रचना पढ़ें : रेखा
जिन्दगी करती है सवाल मुझसे क्या है गम और है क्या खुशी ? अतल सागर में तलाशता है…
रचना पढ़ें : .साथी
मैं कोई गुजारा लम्हा नहीं जिसे भुलाने की कोशिश हो मैं इक सच हूँ मैं इक यथार्थ हूँ…
रचना पढ़ें : प्रयास
क्यों,कलम हाथ आते ही खो जाते हैं शब्द उन साथियों की तरह जो खो गए मात्र अपनत्व का…
रचना पढ़ें : एतबार
कुछ यथार्थ तुम्हारे हैं कुछ यथार्थ मेरे फिर कुछ हैं ---- हमारे यथार्थ में । तुम चलते रेगिस्तान…
रचना पढ़ें : फ़ासले