कविता
रहस्य
हर क्षण होठों पर सिमटी मुस्कराहट के पीछे क्या आपने देखी है- बनावट की मोटी परत क्या महसूस…
रचना पढ़ें : रहस्य
36 रचनाएँ
हर क्षण होठों पर सिमटी मुस्कराहट के पीछे क्या आपने देखी है- बनावट की मोटी परत क्या महसूस…
रचना पढ़ें : रहस्य
तुम भी कहते रहे, हम भी कहते गए रिश्ता हमारे बीच अब कुछ भी नहीं फिर क्यों धड़कने…
रचना पढ़ें : एतबार
तुमने कहा आज अजीब बासीपन, रूकी हुई, जीवनवहीन सी, अब है तुम्हारी जिन्दगी, अजीब अलास सा आता बोलने…
रचना पढ़ें : खोजती मैं
क्या फर्क पड़ता है आघात-प्रतिघात से जब दर्द का एहसास शून्य पड़ जाता है। यथार्थ तड़पता है— महज…
रचना पढ़ें : ‘शून्य एहसास’
संघर्ष’ अन्धकार से लड़ने की परिभाषा से दूर, रोशनी से आवरित उस भीड में, जिसकी चकाचौंध में मिचमिचाने…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना
‘समय की धारा’ गम के साये में समझ पाये, कौन अपने हैं कौन है पराये। पिघली बर्फ,नदी हो…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना
नव अंकुरित कली सी , फिंजा में मोहक खुशबु सी, हवा में सिमटी मद मस्त मस्ती सी, चमकीली…
रचना पढ़ें : याद
कल देर रात तक मोहब्बत,शबाब, शराब, के जाम छलकें होगें आकेस्टरा की धुन पर, थ्रिरकते कदमों, तालियों की…
रचना पढ़ें : ‘कहानी’