क्षणिका
एक सत्य बेल से लिपटे सर्प-सा मन की देहरी –पे सरसराने लगा लम्बी खामोशी गूंजती रही फुंकार कुछ…
रचना पढ़ें : क्षणिका
55 रचनाएँ
एक सत्य बेल से लिपटे सर्प-सा मन की देहरी –पे सरसराने लगा लम्बी खामोशी गूंजती रही फुंकार कुछ…
रचना पढ़ें : क्षणिका
कुछ पाने की जिद्द बदल देती है आचार! व्यवहार! और संस्कार करती है बेचैन छीन लेती है चैन…
रचना पढ़ें : दिशा
वक्त की धार बन कटार शब्दों के टुकड़े करती रही स्याही क्या लिखेगी हाइकु कहानी कविता एहसास के…
रचना पढ़ें : विविध
आदतें भी अजीब हुआ करती हैं....... बात करने की आदत दर्द सुनाने शिकायत करने तारिफ सुनने खुद को…
रचना पढ़ें : आदत
अपनी ही सोच का प्रवाह है- जिन्दगी इस क्षण नाम है -जिन्दगी कुदरत का करिश्मा है - जिन्दगी…
रचना पढ़ें : जिन्दगी
खोज दीवानी आँखों साँसों रिश्ते-नातों जिन्दगी की बातों में इंसानों मकानों दुनिया की दुकानों में खोज रही कौन…
रचना पढ़ें : क्षणिकाएँ
यूँ तो अपनी परछाई भी छोड़ देती है साथ, बिना रोशनी के कौन रहता है, हर लम्हा किसी…
रचना पढ़ें : साथ
‘साथ’ वादों से नहीं इरादों से बना करते हैं इरादे विश्वास में झलका करते हैं दोस्तों विश्वास किया…
रचना पढ़ें : साथ