क्षणिका
शीर्षक रहित रचना
तलाशती रही ज़िन्दगी-साथउनके भी साथ ,जो चलते रहे साथ साथ। ख़ामोशी को अक्सरराह का पत्थर समझठोकरे मिलती हैंचशनी…
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55 रचनाएँ
तलाशती रही ज़िन्दगी-साथउनके भी साथ ,जो चलते रहे साथ साथ। ख़ामोशी को अक्सरराह का पत्थर समझठोकरे मिलती हैंचशनी…
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कुछ ऐसी, तेरी आदत हो गई मुझे ये कैसी इबादत जो खुद से जुदा कर रही मुझे। दिल…
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1 बौद्धिकता के ठेकेदार क्या जाने आम आदमी की ठोकरे देते हैँ नारे जलाते वक़्त की धारणनाये खुद…
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आज फिर बटोरे मैंने, अपनी तन्हाई के टुकड़े जोड़े, दिया इक रूप दी धूप अपने होने की सर्दी…
रचना पढ़ें : अपनी गंध
खुशबू चंद सूखे फूलों सी रिश्तों की महक आज भी मेरी जीवन किताब को, रही हैं महका जिन्हें…
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जिन्दगी में कुछ रिश्ते देते हैं मुस्कान! पहचान! विश्वाश! आत्मविश्वास! नये अहसास! तुजरबा! और कुछ देते हैं- हीनता!…
रचना पढ़ें : सवाल
कौन है -वो शांत बर्फ गिरने के बाद घाटी -सी मासूम सर्दी की भोर -सी चंचल पहली बरसात…
रचना पढ़ें : बूझो
भटकन की रेत पे जलते हैं पाँव कितनी भी तलाशो मिलती नहीं छाँंव । बिना पानी का ये…
रचना पढ़ें : भटकन