क्षणिका
जीवन
देखे हैं तेरी खुशी में, तितलियों के पंखों से रंग । सुनी है मैंने तेरी खुशी में, भँवरों…
रचना पढ़ें : जीवन
55 रचनाएँ
देखे हैं तेरी खुशी में, तितलियों के पंखों से रंग । सुनी है मैंने तेरी खुशी में, भँवरों…
रचना पढ़ें : जीवन
ये एहसास बेकाबू नदी ना हों खामोशी का बांध जरूरी है चाहत है कितनी गहरी नि:शब्द एहसास जरूर…
रचना पढ़ें : एहसास
मांगे जो दो पल सिर्फ अपने लिये हज़ारों बहाने अफ़साने मिले अपनों के भेष में पराये मिले। सीमा…
रचना पढ़ें : पल
कैसे बनेगें हम किसी के जीने का मकसद दोस्त निश्चित है मकसद की डोर तेरी मेरी सोच से…
रचना पढ़ें : अनिश्चित
कभी ख़ामोशी लगती है जुबां प्यार की कौन जाने, कब बन जाये सज़ा प्यार की । सीमा स्मृति
रचना पढ़ें : वक्त
वो आया था मेरी जिन्दगी की सिलवटें पढ़ने देख आईना नि:शब्द लौट गया। सीमा स्मृति
रचना पढ़ें : प्रतिबिम्ब
तुझसे मिलना इक रवायत नहीं किसी उम्र का महकता सुरूर भी नहीं बदली हवाओं में थमा सा कोई…
रचना पढ़ें : मुलाकात
क्यों पनपने लगती है वो बेल, हमारे भीतर ले कोहरे की छुहन । काटते रहे हर बार टुकड़ा…
रचना पढ़ें : कोहरा