क्षणिका
वक्त
देखती तुम्हारी तस्वीर वक्त जादू वक्त पहेली वक्त नशा वक्त सजा वक्त मेहरबानी वक्त निशानी वक्त तकदीर वक्त…
रचना पढ़ें : वक्त
55 रचनाएँ
देखती तुम्हारी तस्वीर वक्त जादू वक्त पहेली वक्त नशा वक्त सजा वक्त मेहरबानी वक्त निशानी वक्त तकदीर वक्त…
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1 वोह सांसों के साथ इक लम्हा बह गया, पकड़ो मत। ये क्या कम है,कौन अपना था समझ…
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1 जिन लम्हों को समझ जिन्दगी, जिया मैंने आज एक अजब पहेली बन जिन्दगी में हैं छाये ।…
रचना पढ़ें : जिन्दगी पहेली
हौंसले बुलन्द हो तो, मंझधार से भी निकल जाती हैं कश्ती वरना तो, किनारों पर भी डूबते देखा…
रचना पढ़ें : रास्ता
जिन्दगी में क्या हुआ अच्छा, हुआ क्या बुरा-घटनाओं से मत आंको वक्त के आईनें में- जिन्दगी सब दिखा…
रचना पढ़ें : आईना
क्षणिक मुलाकात भी बन जाती है-उत्सव तारिखों में सिमटे हो उत्सव -ये जरूरी नहीं।
रचना पढ़ें : उत्सव
बड़े घर की परिभाषा बदल गई कमरे हैं बहुत एक ही कमरे सभी करते थे हँसी-ठिठोली, वो निकल…
रचना पढ़ें : परिभाषा
नमकीन सी हो गई तेरी खामोशी क्या मुझ से हुई कोई गुस्ताखी । 06.12.2013
रचना पढ़ें : ये हुआ