क्षणिका
दूरियाँ
दूरियाँ वक्त की कमी से नहीं शहरों के अंतराल से नहीं एहसास की सरहद में आंकी जाती है।…
रचना पढ़ें : दूरियाँ
55 रचनाएँ
दूरियाँ वक्त की कमी से नहीं शहरों के अंतराल से नहीं एहसास की सरहद में आंकी जाती है।…
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पहले---- तेरी खामोशी प्यार के इकरार का शोर मचाती थी अब----- खामोशी में लिपटा तेरा अहं हर बार…
रचना पढ़ें : बदलाव
कहते हैं मिली हैं सांसे सभी को गिनती भर खेलते खेल इन्हीं सांसो पर सुख :दुख के झूले…
रचना पढ़ें : सांसे
माना तेरी थी मजबूरियाँ क्या किस्मत है टकराना था उनको मेरी ही मोहब्बत के साथ । २७.११.२०१३
रचना पढ़ें : यूँ हुआ
सुना करते थे ओैरों की बेवफाई के किस्से खुद पर जो गुजरी कोई क्या सुनता अपने ही अश्क…
रचना पढ़ें : अपनापन
कल तेरी आँखों में नींद नहीं थी आज मेरी से है,गायब दो किनारे ही अक्सर,जीते हैं इक ही…
रचना पढ़ें : उस पार
जंगल की आग की तरह तेरी याद मेरे अस्तित्व को झुलसाती है बीते वक्त का, हर लम्हा कैटालिस्ट…
रचना पढ़ें : सत्य
मुस्कान बिखरी रहती है कुछ इस कद्र उन लबों पर यूं कि गमे नशा हो अब भी सरूर…
रचना पढ़ें : मुस्कान