क्षणिका
वो क्या जानें
कहते हैं वो जख्म मिलते हैं भर जाने को अश्क बहते हैं गम को भुलाने को ये क्या…
रचना पढ़ें : वो क्या जानें
55 रचनाएँ
कहते हैं वो जख्म मिलते हैं भर जाने को अश्क बहते हैं गम को भुलाने को ये क्या…
रचना पढ़ें : वो क्या जानें
उन बेबस खामोश निगाहों में उतर आया था शून्य सिमट गया था हर एहसास बिखर कर रह गई…
रचना पढ़ें : ‘ इजाजत’
जब भी तेरी तस्वीर,तस्वुर में आती है जिन्दगी पे एतबार की हर कड़ी बिखर जाती है।
रचना पढ़ें : बीता वक्त
स्पर्श केवल, अंघकार की जबान नहीं, यह भाषा है, प्रत्येक जीवन की भट्टी के अंगारो की तरह उकेरा…
रचना पढ़ें : ‘मूक’
याद कोई बादल नहीं, जो आये और चली जाये ये तो वो थिर सूरज है जो चमकता है…
रचना पढ़ें : याद
जो ‘अर्थ’ जिन्दगी को हम देना चाहते हैं अर्थ स्वंय जो पाती है जिन्दगी इसी कशमकश में अक्सर…
रचना पढ़ें : प्रश्न
तेरे कहने से, मैंनें दिया इक रूप अपने एहसासों को बांध कर तेरी याद मुट्ठी में उड़ा रही…
रचना पढ़ें : तेरी याद
पढ लेते हैं ‘कलमा’ सभी कौन पढता और समझता है हाशिए भी कहते हैं कुछ कहानी । सीमा…
रचना पढ़ें : शीर्षक रहित रचना